सम्भाषणम्:क्रियासिद्धिस्सत्त्वे भवति...
विषयः योज्यताम्Jump to navigationJump to search क्रियासिद्धिस्सत्त्वे भवति...
क्रियासिद्धिस्सत्त्वे भवति महतां नोपकरणे । सेवादीक्षित ! चिरप्रतिज्ञ ! मा विस्मर भोस्सूक्तिम् ॥
न धनं न बलं नापि सम्पदा न स्याज्जनानुकम्पा सिद्धा न स्यात् कार्यभूमिका न स्यादपि प्रोत्साह: आवृणोतु वा विघ्नवारिधिस्त्वं मा विस्मर सूक्तिम् ॥
आत्मबलं स्मर बाहुबलं धर परमुखप्रेक्षी मा भू: क्वचिदपि मा भूदात्मविस्मृति: न स्याल्लक्ष्याच्च्यवनम् । आसादय जनमानसप्रीतिं सुचिरं संस्मर सूक्तिम् ॥
अरुणसारथिं विकलसाधनं सूर्यं संस्मर नित्यम् शूरपूरुषान् दृढानजेयान् पदात्पदं स्मर गच्छन् सामान्येतरदृग्भ्यस्सोदर, सिध्यति कार्यमपूर्वम् ॥
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